श्री राज राजेश्वर सहस्त्राबाहु सत्संग (हैहयवंश सार पुस्तक का दुसरा अंश) आज के परिवेश में जब कि हैहयवंश क्षत्रिय समाज अपने अस्तित्व को बचाने और पुन: स्थापित करने के लिए संघर्षरत है , ऐसे में सामाजिक संगठन, एकता, सद्भभावना, और मजबूत सामाजिक परिवेश की स्थापना के लिए कथा या सत्संग भी एक बड़ा माध्यम बन सकता है, जिसके द्वारा हम जन जन तक अपनी पहचान और अपनी खोई हुयी अस्तित्व को पुन्ह: से प्राप्त कर सकते है| जिस प्रकार भगवान विष्णु के रूप की कथा हम सत्यनारायण कथा के रूप में सुनकर अपनी मनो कामना पूर्ण करते है या फिर जिस प्रकार समाज में अन्य समुदायों द्वारा भिन्न भिन्न इष्ठ देवी-देवताओं के सत्संग अपने अपने समुदाय को अपने कर्म अनुसार इच्छित फल प्राप्ति और समुदाय के प्रचार - प्रसार के लिए किये जाता है ठीक उसी प्रकार हम समस्त हैहयवंशी क्षत्रिय समाज के लोगो को भी अपने अपने घरों और सामाजिक स्थलों पर छोटे-बड़े और संभव हो तो बृहद रूप से भगवान विष्णु के एक अंशअवतार श्री राज राजेश्वर सहस्त्राबाहु सत्संग का आयोजन बड़े ही धूम धाम से करना चाहिए| हम इसे अनेक शुभ अवसरों पर या फिर ...
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