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माहिष्मति ( राजराजेश्वर मंदिर,महेश्वर) का महत्त्व (हैहयवंश पुस्तक का चौथा अंश ) मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में इंदौर से लगभग ७० किलोमीटर दखिन में नर्मदा नदी के उतरीं तट पर महेश्वर जिसे माहिष्मति के नाम से भी जाना जाता है स्थित है| इस मंदिर के ठीक   विपरीत नर्मदा के तट के दूसरे छोर पर नावदा टीला स्थान है जोकि ताम्रयुगीन संस्कृत का सूचक और अवशेष के रूप में माना जाता है| हमें महाभारत में महेश्वरपुर और माहिष्मति नगर या स्थान   का उलेख्या भी देखने को मिलता है जो संभवत: महेश्वर या माहिष्मति का ही बोधक है| एक अन्य पुराण पद्म के अनुसार माहिष्मति में ही त्रिपुरासुर का वध हुआ था| लगभग सभी पुरानो और ग्रंथो में यदुवंश के समकालीन ययाति शाखा हैहयवंश का माहिष्मति पर राज्य और अधिकार करने का वरन है, और माहिष्मति ही हैहय वंश के राजाओं की राजधानी भी रही| पुरानो में यह भी वर्णित है की त्रिपुर या त्रिपुरी का विध्वंश शिवजी ने महेश्वर में किया था, पुरानो में प्रिपुरी के मुख्या शाशक तथा तर्कापुर के नाम भी मिलते है| मार्कण्डेय पुराण में कार्तवीर्य को एक हज़ार वर्ष और हरिवंश पुर...